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मंगलवार, 22 जून 2010

गंगा की महिमा

गंगा अन्य नदियों की भांति एक भौगोलिक नदी मात्र नहीं है, वह सुरसरिहै, भागीरथ के प्रयत्न की सफल अमृतधाराहै। वह सतत् प्रवाहिनीऔर सदानीरातो है ही और इन सबसे बढकर वह हर पीढी की, हर एक की मां भी है। इसीलिए गंगा पवित्र हैं, पतितपावनीहैं और पूज्य हैं। गंगा भारतीय संस्कृति का गौरव ही नहीं आधार भी है, वह नदी-घाटी सभ्यता की जननी ही नहीं, अपितु सभ्य समाज की पोषक भी है। वह भौतिक समृद्धि का प्राकृतिक संसाधन होने के साथ ही साथ आध्यात्मिक उन्नति का भी साधन है। गंगा के पावन तट केवल श्रद्धालुओं की आस्थामयीडुबकियों से ही नहीं जीवंत रहे हैं, वे विभिन्न प्रकार के साधकों की साधना स्थली भी बने हैं। जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं-राम भक्ति जहंसुरसरिधारा, सरसइब्रह्म बिचारप्रचारा।

पर्वत राज हिमालय के अंत:स्थलसे निकली यह पुण्यसलिलाभारत के अनेक प्रांतों को संजीवनी प्रदान करती हुई बंगाल की खाडी में अंतर्लीन हो जाती है। देवनदी अपनी इस सुदीर्घ यात्रा में हरिद्वार, प्रयाग, काशी आदि अनेक नगरों को तीर्थ बनाकर एक नई सामाजिक एवं पर्यटनीयसंस्कृति का सुसंगमनकराती है। गंगा की तरलताऊर्जादायीहै, निर्मलता शांतिदायी और अविरलतावरदायीहै। जिसे भी गंग-तीर्थ का पावन प्रवास प्राप्त हुआ उसका जीवन पुण्यमयहो गया। जिसने भी गंगा को मां मान सेवा की वह पवित्रमनहो मोक्ष को प्राप्त हुआ और जिसने भी गंगा को दरश परस मज्जन अरुपाना के माध्यम से अपनी श्रद्धा निवेदित की उसे परमतुष्टिका नैसर्गिक आनंद मिला। यद्यपि आज गंगा बहुत मैली हो चुकी है फिर भी न तो श्रद्धालुओं की श्रद्धा घटी है और न ही गंगा तीर्थो पर जुटने वाली भीड ही। हां, इतना परिवर्तन अवश्य हुआ है कि गंगा की मलिनता को लेकर जनजाग्रतिबढी है, लोगों का प्रदूषण फैलाने वालों के प्रति आक्रोश बढा है। आज सभी चाहते हैं कि गंगा पूर्व की भांति सदानीराहो, इसके लिए वे नाना प्रकार के संकल्पों, यात्राओं, परियोजनाओं आदि के माध्यम से जनता को जागरूक बनाने के साथ ही साथ सरकार से भी गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

7 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकाश सोनीजी
    आपका ब्लॉगसंसार में स्वागत है ।
    आशा है ब्लॉगिंग में आपके अनुभव सुखद रहेंगे ।
    प्रस्तुत आलेख गंगा की महिमा पसंद आया , बधाई !

    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  2. आज सबसे बड़ी चुनौती है गंगा मैया को प्रदुषण से मुक्त करने की. जब तक सरकार कड़े से कड़े उपाय नहीं करेगी ये असंभव है. गंगा के किनारे स्थित तमाम उद्योग धंधे स्थानांतरित किये जाएँ. किसी भी प्रकार का गन्दा पानी गंगाजी में नहीं छोड़ा जाए. लेकिन इन सबसे बड़ी आवश्यकता है जनता के जागरूक होने की. अगर जनता जागरूक हो जाए तो गंगा मैय्या को प्रदुषण मुक्त करना और आसां हो जाएगा. गंगा हमारे देश की एक बहुत ही महत्वपूर्ण धरोहर है. यह हम सब का कर्त्तव्य है कि हम गंगा मैय्या को फिर से स्वच्छ और निर्मल करें. गंगा सबके पाप धोते धोते मैली हो गई है. अब समय आ गया है कि हम इस गंगा की सारी गन्दगी तो दूर करें और यह प्रण लें कि भविष्य में इसे प्रदूषित करने का पाप नहीं करेंगे.

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  3. गंगा की पवित्रता और उपयोगिता को चिन्हित करता आलेख हृदयस्पर्शी है+ आभार!

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  4. हालाँकि आपका ब्लॉग एक वर्ष पुराना है परन्तु निरंतर लेखन के अभाव के कारण आप ब्लॉग-जगत से कटे हुए हैं. कृपया अन्य ब्लॉग को पढ़ें, उन पर टिप्पणी करें और आलेख भी लिखते रहें.
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    गंगा तो पूरे विश्व में एक ही है और अतुलनीय है.
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    आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  5. जिन्दा लोगों की तलाश!
    मर्जी आपकी, आग्रह हमारा!!


    काले अंग्रेजों के विरुद्ध जारी संघर्ष को आगे बढाने के लिये, यह टिप्पणी प्रदर्शित होती रहे, आपका इतना सहयोग मिल सके तो भी कम नहीं होगा।
    =0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=0=

    सच में इस देश को जिन्दा लोगों की तलाश है। सागर की तलाश में हम सिर्फ बूंद मात्र हैं, लेकिन सागर बूंद को नकार नहीं सकता। बूंद के बिना सागर को कोई फर्क नहीं पडता हो, लेकिन बूंद का सागर के बिना कोई अस्तित्व नहीं है। सागर में मिलन की दुरूह राह में आप सहित प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति का सहयोग जरूरी है। यदि यह टिप्पणी प्रदर्शित होगी तो विचार की यात्रा में आप भी सारथी बन जायेंगे।

    हमें ऐसे जिन्दा लोगों की तलाश हैं, जिनके दिल में भगत सिंह जैसा जज्बा तो हो, लेकिन इस जज्बे की आग से अपने आपको जलने से बचाने की समझ भी हो, क्योंकि जोश में भगत सिंह ने यही नासमझी की थी। जिसका दुःख आने वाली पीढियों को सदैव सताता रहेगा। गौरे अंग्रेजों के खिलाफ भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, असफाकउल्लाह खाँ, चन्द्र शेखर आजाद जैसे असंख्य आजादी के दीवानों की भांति अलख जगाने वाले समर्पित और जिन्दादिल लोगों की आज के काले अंग्रेजों के आतंक के खिलाफ बुद्धिमतापूर्ण तरीके से लडने हेतु तलाश है।

    इस देश में कानून का संरक्षण प्राप्त गुण्डों का राज कायम हो चुका है। सरकार द्वारा देश का विकास एवं उत्थान करने व जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा खडा करने के लिये, हमसे हजारों तरीकों से टेक्स वूसला जाता है, लेकिन राजनेताओं के साथ-साथ अफसरशाही ने इस देश को खोखला और लोकतन्त्र को पंगु बना दिया गया है।

    अफसर, जिन्हें संविधान में लोक सेवक (जनता के नौकर) कहा गया है, हकीकत में जनता के स्वामी बन बैठे हैं। सरकारी धन को डकारना और जनता पर अत्याचार करना इन्होंने कानूनी अधिकार समझ लिया है। कुछ स्वार्थी लोग इनका साथ देकर देश की अस्सी प्रतिशत जनता का कदम-कदम पर शोषण एवं तिरस्कार कर रहे हैं।

    आज देश में भूख, चोरी, डकैती, मिलावट, जासूसी, नक्सलवाद, कालाबाजारी, मंहगाई आदि जो कुछ भी गैर-कानूनी ताण्डव हो रहा है, उसका सबसे बडा कारण है, भ्रष्ट एवं बेलगाम अफसरशाही द्वारा सत्ता का मनमाना दुरुपयोग करके भी कानून के शिकंजे बच निकलना।

    शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों को सामने रखकर 1993 में स्थापित-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)-के 17 राज्यों में सेवारत 4300 से अधिक रजिस्टर्ड आजीवन सदस्यों की ओर से दूसरा सवाल-

    सरकारी कुर्सी पर बैठकर, भेदभाव, मनमानी, भ्रष्टाचार, अत्याचार, शोषण और गैर-कानूनी काम करने वाले लोक सेवकों को भारतीय दण्ड विधानों के तहत कठोर सजा नहीं मिलने के कारण आम व्यक्ति की प्रगति में रुकावट एवं देश की एकता, शान्ति, सम्प्रभुता और धर्म-निरपेक्षता को लगातार खतरा पैदा हो रहा है! अब हम स्वयं से पूछें कि-हम हमारे इन नौकरों (लोक सेवकों) को यों हीं कब तक सहते रहेंगे?

    जो भी व्यक्ति इस जनान्दोलन से जुडना चाहें, उसका स्वागत है और निःशुल्क सदस्यता फार्म प्राप्ति हेतु लिखें :-

    (सीधे नहीं जुड़ सकने वाले मित्रजन भ्रष्टाचार एवं अत्याचार से बचाव तथा निवारण हेतु उपयोगी कानूनी जानकारी/सुझाव भेज कर सहयोग कर सकते हैं)

    डॉ. पुरुषोत्तम मीणा
    राष्ट्रीय अध्यक्ष
    भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
    राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यालय
    7, तँवर कॉलोनी, खातीपुरा रोड, जयपुर-302006 (राजस्थान)
    फोन : 0141-2222225 (सायं : 7 से 8) मो. 098285-02666

    E-mail : dr.purushottammeena@yahoo.in

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  6. sir apne जिन्दा लोगों की तलाश!likha !
    padh kar kafi khushi hui sir aasha karta hu ki ap ham navjavano ko aise hi marg darshan dete rahenge

    praksh soni
    TV LIVE

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PRAKASH SONI